नरेंद्र मोदी। Nagendra modi

नरेंद्र मोदी इनकी गिनती संसार के प्रसिद्ध लोगों में होती है मोदी जी ने अपने काम से ना कि अपने देश बल्कि विदेशों में भी भारत का नाम रोशन किया है इन्होंने अपने कार्यकाल में कठिन निर्णय लेकर अपने देश का मान बड़ा है अब कोई भी विदेशी आतंकी ताकत हम पर बुरी नजर है डालने की हिम्मत नहीं करते।

यहां पर हम आप को मोदी जी के बारे में पूरी जानकारी देने का प्रयास करेंगे जिससे आपको मोदी जी के बारे में पूरी जानकारी मिल सके।

प्रारंभिक जीवन

मोदी जी का जन्म 17 सितंबर 1950 वडनगर,मेहसाणा जिले  मे हुआ था वह गुजराती हिंदू परिवार में हुए थे उनके पिता का नाम दामोदरदास मूलचंद मोदी और माता का नाम हीराबेन मोदी था यह छह भाई-बहनों में तीसरे नंबर के है।

13 वर्ष की आयु में नरेंद्र जी की सगाई जशोदाबेन से हुई थी और 17 साल में उनका विवाह किया गया उस समय साथ रहने के बाद मोदी जी ने ग्रस्त आश्रम का क्या कर दिया।

राजनीतिक जीवन

विद्यालय विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए ही वह राष्ट्रीय सेवक संघ के संपर्क में आए और उसके सक्रिय कार्यकर्ता बन गए वहीं से उन्हें भारतीय जनता पार्टी से जोड़ने का मौका मिला और उन्होंने गुजरात में भारतीय जनता पार्टी का जनाधार बढ़ाने में अपना सहयोग देने लगे 1995 में मोदी जी की मेहनत काम आई और गुजरात में भारतीय जनता पार्टी दो तिहाई वोटों से विजय हुई।

उसी वर्ष नरेंद्र मोदी जी को देश के दो प्रमुख घटनाओं में शामिल होने का मौका भी मिला जिनमें  उनके कार्यों की काफी प्रशंसा भी वह घटनाएं थी आडवाणी की रथ यात्रा और मुरली मनोहर जोशी की रथ यात्रा। उसके बाद जब शंकर सिंह वाघेला ने पार्टी से त्यागपत्र दे दिया तो केशुभाई पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया और नरेंद्र मोदी जी को दिल्ली गुनाह दिया गया और केंद्र मंत्री का दायित्व सौंपा गया।

1995 में राष्ट्रीय मन्त्री के नाते उन्हें पाँच प्रमुख राज्यों में पार्टी संगठन का काम दिया गया, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। 1998 में उन्हें पदोन्नत करके राष्ट्रीय महामन्त्री (संगठन) का उत्तरदायित्व दिया गया। इस पद पर वह अक्टूबर 2001 तक काम करते रहे। भारतीय जनता पार्टी ने अक्टूबर 2001 में केशुभाई पटेल को हटाकर गुजरात के मुख्यमन्त्री पद की कमान नरेन्द्र मोदी को सौंप दी।

मुख्यमन्त्री के रूप में

2001 में केशुभाई पटेल की सेहत बिगड़ने लगी थी और भाजपा चुनाव में कई सीट हार रही थी।इसके बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुख्यमंत्री के रूप में मोदी को नए उम्मीदवार के रूप में रखते हैं। हालांकि भाजपा के नेता लालकृष्ण आडवाणी, मोदी के सरकार चलाने के अनुभव की कमी के कारण चिंतित थे। मोदी ने पटेल के उप मुख्यमंत्री बनने का प्रस्ताव ठुकरा दिया और आडवाणी व अटल बिहारी वाजपेयी से बोले कि यदि गुजरात की जिम्मेदारी देनी है तो पूरी दें अन्यथा न दें। 3 अक्टूबर 2001 को यह केशुभाई पटेल के जगह गुजरात के मुख्यमंत्री बने। इसके साथ ही उन पर दिसम्बर 2002 में होने वाले चुनाव की पूरी जिम्मेदारी भी थी।

नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री का अपना पहला कार्यकाल 7 अक्टूबर 2001 से शुरू किया। इसके बाद मोदी ने राजकोट विधानसभा चुनाव लड़ा। जिसमें काँग्रेस पार्टी के आश्विन मेहता को 14,728 मतों से हराया था।

नरेन्द्र मोदी अपनी विशिष्ट जीवन शैली के लिये समूचे राजनीतिक हलकों में जाने जाते हैं। उनके व्यक्तिगत स्टाफ में केवल तीन ही लोग रहते हैं, कोई भारी-भरकम अमला नहीं होता। लेकिन कर्मयोगी की तरह जीवन जीने वाले मोदी के स्वभाव से सभी परिचित हैं इस नाते उन्हें अपने कामकाज को अमली जामा पहनाने में कोई दिक्कत पेश नहीं आती। उन्होंने गुजरात में कई ऐसे हिन्दू मन्दिरों को भी ध्वस्त करवाने में कभी कोई कोताही नहीं बरती जो सरकारी कानून कायदों के मुताबिक नहीं बने थे। हालाँकि इसके लिये उन्हें विश्व हिन्दू परिषद जैसे संगठनों का कोपभाजन भी बनना पड़ा, परन्तु उन्होंने इसकी रत्ती भर भी परवाह नहीं की; जो उन्हें उचित लगा करते रहे। वे एक लोकप्रिय वक्ता हैं, जिन्हें सुनने के लिये बहुत भारी संख्या में श्रोता आज भी पहुँचते हैं। कुर्ता-पायजामा व सदरी के अतिरिक्त वे कभी-कभार सूट भी पहन लेते हैं। अपनी मातृभाषा गुजराती के अतिरिक्त वह हिन्दी में ही बोलते हैं

मोदी के नेतृत्व में2012 में हुए गुजरात विधान सभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया। भाजपा को इस बार 115 सीटें मिलीं

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